Sahajanand Swami Jivan Darshan in Hindi

Sahajanand Swami Jivan Darshan in Hindi

Auteur : प्रा. डो. श्री हिंमतभाई ठक्कर, Shree Swaminarayan Gurukul Rajkot Sansthan

Date de publication : Non disponible

Éditeur : Rajkot Gurukul

Nombre de pages : 193

Résumé du livre

भगवान श्री स्वामिनारायण महाप्रभु का अवतरण अनेक जीवों के कल्याण हेतु हुआ था । श्रीजी महाराज के लीलाचरित्र प्रेरणात्मक हैं और उनके सिद्धान्त एवं संदेश सरल, सुलभ ही नहीं आचरणीय हैं । दूसरे शब्दों में कहा जाय तो सर्व जीवहितावह हैं ।


भगवान स्वामिनारायण, जो तत्कालीन समय में सहजानंद स्वामी के नामसे विशेष रुपसे पहचाने जाते थे और अवतार के अवतारी अर्थात्‌ सर्वावतारी के रुप में स्वीकृत हो चुके थे । उनके अवतार हेतु, जीवन और कार्य के साथ आत्यन्तिक कल्याण संबंधी दार्शनिक आध्यात्मिक विचार व्यापक जनसमुदाय को सुलभ हो सके इस हेतु प्रस्तुत ग्रंथका प्रकाशन हुआ है ।


श्रीजी महाराज के सिद्धांतों की पुष्टि एवं सर्वजीवहितकारी संदेश को जनसमाज को सुलभ कराने के शुभ हेतु हमारे गुरुदेव शास्त्रीजी महाराज श्री धर्मजीवनदासजी स्वामीने इ.स.१९४८ में श्री स्वामिनारायण गुरुकुल-राजकोट (गुजरात)की स्थापना की जिसकी आज देशविदेश में बारह शाखाएँ हैं । जिनका कार्यभार गुरुवर्य महंत श्री देवकृष्णदासजी स्वामी वयोवृद्ध पूज्य पाद जोगी स्वामी के आशीवार्द तथा सेवामूर्ति पू. कोठारी श्री हरिजीवनदासजी स्वामी के स्नेहाद्र सांनिध्य में करीब १६० त्यागी संतों के सेवा-समर्पण से सुचारु रुप से चला रहे हैं ।

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