Karbala

Karbala

Auteur : Premchand

Date de publication : Non disponible

Éditeur : Lokbharti Prakashan

Nombre de pages : 200

Résumé du livre

प्रेमचन्द का यह नाटक कर्बला की इतिहास-प्रसिद्ध घटना पर आधारित है जिसमें पैगम्बर हज़रत मुहम्मद के नवासे हज़रत हुसैन अपने कई परिजनों और समर्थकों के साथ शहीद हो गए थे। कर्बला की लड़ाई मुसलमानों के लिए ऐतिहासिक रूप से जितनी महत्त्वपूर्ण है उतनी ही धार्मिक रूप से भी, इसलिए अनगिनत लेखकों-कवियों ने अपनी रचनाओं में इसका बयान किया है, विशेषकर फ़ारसी-उर्दू साहित्य में काफ़ी कुछ लिखा गया है। लेकिन प्रेमचन्द से पहले इस घटना को विषय बनाकर नाटक सम्भवतः नहीं लिखा गया। हज़रत हुसैन सचाई और इनसानियत की रक्षा के लिए लड़े थे। इस लड़ाई में बहुत से हिन्दुओं ने भी उनका साथ दिया था। उनके साथ कुछ हिन्दू भी शहीद हुए थे। प्रेमचन्द ने इस ऐतिहासिक तथ्य का समावेश इस नाटक में किया है। उनका मकसद स्पष्ट है, वे न केवल मेलजोल की संस्कृति की एक अनुपम ऐतिहासिक मिसाल की याद दिलाते हैं बल्कि समाज में मेलजोल की संस्कृति को सुदृढ़ करने की वर्तमान आवश्यकता को भी रेखांकित करते हैं।

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